20151112

10 दिनों की मोहलत......

एक राजा था ।उसने 10 खूंखार जंगली कुत्ते पाल रखे थे ।जिनका इस्तेमाल वह लोगों को उनके द्वारा की गयी गलतियों पर मौत की सजा देने के लिए करता था ।
एक बार कुछ ऐसा हुआ कि राजा के एक पुराने मंत्री से कोई गलती हो गयी। अतः क्रोधित होकर राजा ने उसे शिकारी कुत्तों के सम्मुख फिकवाने का आदेश दे डाला।
दस दिन की मोहलत…

सजा दिए जाने से पूर्व राजा ने मंत्री से उसकी आखिरी इच्छा पूछी।

“राजन ! मैंने आज्ञाकारी सेवक के रूप में आपकी 10 सालों से सेवा की है…मैं सजा पाने से पहले आपसे 10 दिनों की मोहलत चाहता हूँ ।” मंत्री ने राजा से निवेदन किया ।

राजा ने उसकी बात मान ली ।
दस दिन बाद राजा के सैनिक मंत्री को पकड़ कर लाते हैं और राजा का इशारा पाते ही उसे खूंखार कुत्तों के सामने फेंक देते हैं। परंतु यह क्या कुत्ते मंत्री पर टूट पड़ने की बाजए अपनी पूँछ हिला-हिला कर मंत्री के ऊपर कूदने लगते हैं और प्यार से उसके पैर चाटने लगते हैं।

राजा आश्चर्य से यह सब देख रहा था उसने मन ही मन सोचा कि आखिर इन खूंखार कुत्तों को क्या हो गया है ? वे इस तरह क्यों व्यवहार कर रहे हैं ?

आखिरकार राजा से रहा नहीं गया उसने मंत्री से पुछा ,” ये क्या हो रहा है , ये कुत्ते तुम्हे काटने की बजाये तुम्हारे साथ खेल क्यों रहे हैं?”

” राजन ! मैंने आपसे जो १० दिनों की मोहलत ली थी , उसका एक-एक क्षण मैं इन बेजुबानो की सेवा करने में लगा दिया। मैं रोज इन कुत्तों को नहलाता ,खाना खिलाता व हर तरह से उनका ध्यान रखता। ये कुत्ते खूंखार और जंगली होकर भी मेरे दस दिन की सेवा नहीं भुला पा रहे हैं परंतु खेद है कि आप प्रजा के पालक हो कर भी मेरी 10 वर्षों की स्वामीभक्ति भूल गए और मेरी एक छोटी सी त्रुटि पर इतनी बड़ी सजा सुन दी.! ”

राजा को अपनी भूल का एहसास हो चुका था , उसने तत्काल मंत्री को आज़ाद करने का हुक्म दिया और आगे से ऐसी गलती ना करने की सौगंध ली

मित्रों , कई बार इस राजा की तरह हम भी किसी की बरसों की अच्छाई को उसके एक पल की बुराई के आगे भुला देते हैं। यह कहानी हमें क्षमाशील होना सीखाती है, ये हमें सबक देती है कि हम किसी की हज़ार अच्छाइयों को उसकी एक बुराई के सामने छोटा ना होने दें।
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20151013

KHEER

20151012

वो हमारे पास एक अनाथ बच्चे को गोद लेने आए थे!



एक बेटा अपने बूढ़े पिता को वृद्धाश्रम एवं अनाथालय में छोड़कर वापस लौट रहा था;

उसकी पत्नी ने उसे यह सुनिश्चत करने के लिए फोन किया कि पिता त्योहार वगैरह की छुट्टी में भी वहीं रहें घर ना चले आया करें !

बेटा पलट के गया तो पाया कि उसके पिता वृद्धाश्रम के प्रमुख के साथ ऐसे घलमिल कर बात कर रहे हैं जैसे बहुत पुराने और प्रगाढ़ सम्बंध हों...

तभी उसके पिता अपने कमरे की व्यवस्था देखने के लिए वहाँ से चले गए.. अपनी उत्सुकता शांत करने के लिए बेटे ने अनाथालय प्रमुख से पूँछ ही लिया...

"आप मेरे पिता को कब से जानते हैं ? "

मुस्कुराते हुए वृद्ध ने जवाब दिया...

"पिछले तीस साल से...जब वो हमारे पास एक अनाथ बच्चे को गोद लेने आए थे! "

PERSONAL LIFE GURU: पहला कदम ही इसान को आखिरी कदम तक लेकर जाता है

PERSONAL LIFE GURU: पहला कदम ही इसान को आखिरी कदम तक लेकर जाता है: अपने समय के महान वैज्ञानिक थॉमस बहुत ही मेहनती इंसान थे।बचपन में उन्हें यह कहकर स्कूल से निकाल दिया गया कि वह मंद बुद्धि बालक है। उसी ...

A suggestion to pm office !

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20151010

पहली बार मुझे मेरी ईमानदारी का इनाम मिला था !!......


इस साल मेरा सात वर्षीय बेटा दूसरी कक्षा मैं प्रवेश पा गया!! क्लास मैं हमेशा से अव्वल आता रहा है!

पिछले दिनों तनख्वाह मिली तो…  मैं उसे नयी स्कूल ड्रेस और जूते दिलवाने के लिए बाज़ार ले गया !
बेटे ने जूते लेने से ये कह कर मना कर दिया की पुराने जूतों को बस थोड़ी-सी मरम्मत की जरुरत है
वो अभी इस साल काम दे सकते हैं!

अपने जूतों की बजाये उसने मुझे अपने दादा की कमजोर हो चुकी नज़र के लिए नया चश्मा बनवाने को कहा !
मैंने सोचा बेटा अपने दादा से शायद बहुत प्यार करता है इसलिए अपने जूतों की बजाय उनके चश्मे को ज्यादा
जरूरी समझ रहा है ! खैर मैंने कुछ कहना जरुरी नहीं समझा और उसे लेकर ड्रेस की दुकान पर पहुंचा…..
दुकानदार ने बेटे के साइज़ की सफ़ेद शर्ट निकाली … डाल कर देखने पर शर्ट एक दम फिट थी….. फिर भी बेटे ने थोड़ी लम्बी शर्ट दिखाने को कहा !!!!

मैंने बेटे से कहा : बेटा ये शर्ट तुम्हें बिल्कुल सही है तो फिर और लम्बी क्यों ?
बेटे ने कहा :पिता जी मुझे शर्ट निक्कर के अंदर ही डालनी होती है इसलिए थोड़ी लम्बी भी होगी तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा……. लेकिन यही शर्ट मुझे अगली क्लास में भी काम आ जाएगी ……
पिछली वाली शर्ट भी अभी नयी जैसी ही पड़ी है लेकिन छोटी होने की वजह से मैं उसे पहन नहीं पा रहा !
मैं खामोश रहा !!
घर आते वक़्त मैंने बेटे से पूछा : तुम्हे ये सब बातें कौन सिखाता है बेटा ?
बेटे ने कहा: पिता जी मैं अक्सर देखता था कि कभी माँ अपनी साडी छोड़कर तो कभी आप अपने जूतों को छोडकर हमेशा मेरी किताबों और कपड़ो पैर पैसे खर्च कर दिया करते हैं !
गली- मोहल्ले में सब लोग कहते हैं के आप बहुत ईमानदार आदमी हैं!
और हमारे साथ वाले राजू के पापा को सब लोग चोर, कुत्ता, बे-ईमान, रिश्वतखोर और जाने क्या क्या कहते हैं,
जबकि आप दोनों एक ही ऑफिस में काम करते हैं…..
जब सब लोग आपकी तारीफ करते हैं तो मुझे बड़ा अच्छा लगता है…..
मम्मी और दादा जी भी आपकी तारीफ करते हैं ! पिता जी मैं चाहता हूँ कि….
मुझे कभी जीवन में नए कपडे, नए जूते मिले या न मिले
लेकिन कोई आपको चोर, बे-ईमान, रिश्वतखोर या कुत्ता न कहे !!!!!
मैं आपकी ताक़त बनना चाहता हूँ पिता जी, आपकी कमजोरी नहीं !
बेटे की बात सुनकर मैं निरुतर था! आज मुझे पहली बार मुझे मेरी ईमानदारी का इनाम मिला था !!
आज बहुत दिनों बाद आँखों में ख़ुशी, गर्व और सम्मान के आंसू थे…!!

20150928

संतरे बेचती बूढ़ी औरत.....


एक डलिया में संतरे बेचती बूढ़ी औरत से एक युवा अक्सर संतरे खरीदता ।

अक्सर, खरीदे संतरों से एक संतरा निकाल उसकी एक फाँक चखता और कहता, "ये कम मीठा लग रहा है, देखो !" बूढ़ी औरत संतरे को चखती और प्रतिवाद करती "ना बाबू मीठा तो है!"

वो उस संतरे को वही छोड़, बाकी संतरे ले गर्दन झटकते आगे बढ़ जाता।

युवा अक्सर अपनी पत्नी के साथ होता था, एक दिन पत्नी नें पूछा "ये संतरे हमेशा मीठे ही होते हैं, पर यह नौटंकी तुम हमेशा क्यों करते हो ?"

युवा ने पत्नी को एक मघुर मुस्कान के साथ बताया "वो बूढ़ी माँ संतरे बहुत मीठे बेचती है, पर खुद कभी नहीं खाती, इस तरह उसे मै संतरे खिला देता हूँ ।

एक दिन, बूढ़ी माँ से, उसके पड़ोस में सब्जी बेचनें वाली औरत ने सवाल किया, ये झक्की लड़का संतरे लेते इतनी चख चख करता है, पर संतरे तौलते मै तेरे पलड़े देखती हूँ, तू हमेशा उसकी चख चख में, उसे जादा संतरे तौल देती है ।

बूढ़ी माँ नें साथ सब्जी बेचने वाली से कहा "उसकी चख चख संतरे के लिए नहीं, मुझे संतरा खिलानें को लेकर होती है, वो समझता है में उसकी बात समझती नही,मै बस उसका प्रेम देखती हूँ, पलड़ो पर संतरे अपनें आप बढ़ जाते हैं ।

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20150908

करीब तीस साल का एक युवक मुंबई के प्रसिद्ध टाटा कैंसर अस्पताल के सामने फुटपाथ पर ......



करीब तीस साल का एक युवक मुंबई के प्रसिद्ध टाटा कैंसर अस्पताल के सामने फुटपाथ पर खड़ा था। 

युवक वहां अस्पताल की सीढिय़ों पर मौत के द्वार पर खड़े मरीजों को बड़े ध्यान दे देख रहा था, 

जिनके चेहरों पर दर्द और विवषता का भाव स्पष्ट नजर आ रहा था।

इन रोगियों के साथ उनके रिश्तेदार भी परेशान थे। 

थोड़ी देर में ही यह दृष्य युवक को परेशान करने लगा।

वहां मौजूद रोगियों में से अधिकांश दूर दराज के गांवों के थे, जिन्हे यह भी नहीं पता था कि क्या करें, किससे मिले? इन लोगों के पास दवा और भोजन के भी पैसे नहीं थे।

टाटा कैंसर अस्पताल के सामने का यह दृश्य देख कर वह तीस साल का युवक भारी मन से घर लौट आया। 

उसने यह ठान लिया कि इनके लिए कुछ करूंगा। कुछ करने की चाह ने उसे रात-दिन सोने नहीं दिया। अंतत: उसे एक रास्ता सूझा..

उस युवक ने अपने होटल को किराये पर देक्रर कुछ पैसा उठाया। उसने इन पैसों से ठीक टाटा कैंसर अस्पताल के सामने एक भवन लेकर धर्मार्थ कार्य (चेरिटी वर्क) शुरू कर दिया। 

उसकी यह गतिविधि अब 27 साल पूरे कर चुकी है और नित रोज प्रगति कर रही है। उक्त चेरिटेबिल संस्था कैंसर रोगियों और उनके रिश्तेदारों को निशुल्क भोजन उपलब्ध कराती है। 

करीब पचास लोगों से शुरू किए गए इस कार्य में संख्या लगातार बढ़ती गई। मरीजों की संख्या बढऩे पर मदद के लिए हाथ भी बढऩे लगे। सर्दी, गर्मी, बरसात हर मौसम को झेलने के बावजूद यह काम नहीं रूका। 

यह पुनीत काम करने वाले युवक का नाम था हरकचंद सावला। 

एक काम में सफलता मिलने के बाद हरकचंद सावला जरूरतमंदों को निशुल्क दवा की आपूर्ति शुरू कर दिए। 

इसके लिए उन्होंने मैडीसिन बैंक बनाया है, जिसमें तीन डॉक्टर और तीन फार्मासिस्ट स्वैच्छिक सेवा देते हैं। इतना ही नहीं कैंसर पीडि़त बच्चों के लिए खिलौनों का एक बैंक भी खोल दिया गया है। आपको जान कर आश्चर्य होगा कि सावला द्वारा कैंसर पीडि़तों के लिए स्थापित 'जीवन ज्योतÓ ट्रस्ट आज 60 से अधिक प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। 

57 साल की उम्र में भी सावला के उत्साह और ऊर्जा 27 साल पहले जैसी ही है। 

मानवता के लिए उनके योगदान को नमन करने की जरूरत है। 

यह विडंबना ही है कि आज लोग 20 साल में 200 टेस्ट मैच खेलने वाले सचिन को कुछ शतक और तीस हजार रन बनाने के लिए भगवान के रूप में देखते हैं।

जबकि 10 से 12 लाख कैंसर रोगियों को मुफ्त भोजन कराने वाले को कोई जानता तक नहीं।

यहां मीडिया की भी भूमिका पर सवाल है, जो सावला जैसे लोगों को नजर अंदाज करती है।

यहां यह भी बता दे कि गूगल के पास सावला की एक तस्वीर तक नहीं है।

यह हमे समझना होगा कि पंढरपुर, शिरडी में साई मंदिर, तिरुपति बाला जी आदि स्थानों पर लाखों रुपये दान करने से भगवान नहीं मिलेगा। 

भगवान हमारे आसपास ही रहता है। लेकिन हम बापू, महाराज या बाबा के रूप में विभिन्न स्टाइल देव पुरुष के पीछे पागलों की तरह चल रहे हैं। 

इसके बाजवूद जीवन में कठिनाइयां कम नहीं हो रही हैं और मृत्यु तक यह बनी रहेगी।

परतुं बीते 27 साल से कैंसर रोगियों और उनके रिश्तेदारों को हरकचंद सावला के रूप में भगवान ही मिल गया है।

इस संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं ताकि हरकचंद्र सावला को उनके हिस्से की प्रसिद्धि मिल सके और ऐसे कार्य करने वालो को बढावा मिले

ये सवाल भी है की क्या भारत रत्न के हक़दार हरकचंद्र सावला जैसे लोग हैं या सचिन तेन्दुलकर, राजीव गाँधी जैसे लोग।


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20150722

जीवन” का नवीन अर्थ - पिज्जा

Image result for जीवन” का नवीन अर्थ - पिज्जा
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भूले
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पत्नी ने कहा - आज धोने के लिए ज्यादा कपड़े मत निकालना…

पति- क्यों??
उसने कहा..- अपनी काम वाली बाई दो दिन नहीं आएगी…
पति- क्यों??
पत्नी- गणपति के लिए अपने नाती से मिलने बेटी के यहाँ जा रही है, बोली थी…
पति- ठीक है, अधिक कपड़े नहीं निकालता…
पत्नी- और हाँ!!! गणपति के लिए पाँच सौ रूपए दे दूँ उसे? त्यौहार का बोनस..
पति- क्यों? अभी दिवाली आ ही रही है, तब दे देंगे…
पत्नी- अरे नहीं बाबा!! गरीब है बेचारी, बेटी-नाती के यहाँ जा रही है, तो उसे भी अच्छा लगेगा… और इस महँगाई के दौर में उसकी पगार से त्यौहार कैसे मनाएगी बेचारी!!
पति- तुम भी ना… जरूरत से ज्यादा ही भावुक हो जाती हो…
पत्नी- अरे नहीं… चिंता मत करो… मैं आज का पिज्जा खाने का कार्यक्रम रद्द कर देती हूँ… खामख्वाहपाँच सौ रूपए उड़ जाएँगे, बासी पाव के उन आठ टुकड़ों के पीछे…
पति- वा, वा… क्या कहने!! हमारे मुँह से पिज्जा छीनकर बाई की थाली में??
तीन दिन बाद… पोंछा लगाती हुई कामवाली बाई से पति ने पूछा...
पति- क्या बाई?, कैसी रही छुट्टी?
बाई- बहुत बढ़िया हुई साहब… दीदी ने पाँच सौ रूपए दिए थे ना.. त्यौहार का बोनस..
पति- तो जा आई बेटी के यहाँ…मिल ली अपने नाती से…?
बाई- हाँ साब… मजा आया, दो दिन में 500 रूपए खर्च कर दिए…
पति- अच्छा!! मतलब क्या किया 500 रूपए का??

बाई- नाती के लिए 150 रूपए का शर्ट, 40 रूपए की गुड़िया, बेटी को 50 रूपए के पेढे लिए, 50 रूपए के पेढे मंदिर में प्रसाद चढ़ाया, 60 रूपए किराए के लग गए.. 25 रूपए की चूड़ियाँ बेटी के लिए और जमाई के लिए 50 रूपए का बेल्ट लिया अच्छा सा… बचे हुए 75 रूपए नाती को दे दिए कॉपी-पेन्सिल खरीदने के लिए… झाड़ू-पोंछा करते हुए पूरा हिसाब उसकी ज़बान पर रटा हुआ था…

पति- 500 रूपए में इतना कुछ???

वह आश्चर्य से मन ही मन विचार करने लगा...उसकी आँखों के सामने आठ टुकड़े किया हुआ बड़ा सा पिज्ज़ा घूमने लगा, एक-एक टुकड़ा उसके दिमाग में हथौड़ा मारने लगा… अपने एक पिज्जा के खर्च की तुलना वह कामवाली बाई के त्यौहारी खर्च से करने लगा… पहला टुकड़ा बच्चे की ड्रेस का, दूसरा टुकड़ा पेढे का, तीसरा टुकड़ा मंदिर का प्रसाद, चौथा किराए का, पाँचवाँ गुड़िया का, छठवां टुकड़ा चूडियों का, सातवाँ जमाई के बेल्ट का और आठवाँ टुकड़ा बच्चे की कॉपी-पेन्सिल का..आज तक उसने हमेशा पिज्जा की एक ही बाजू देखी थी, कभी पलटाकर नहीं देखा था कि पिज्जा पीछे से कैसा दिखता है… लेकिन आज कामवाली बाई ने उसे पिज्जा की दूसरी बाजू दिखा दी थी… पिज्जा के आठ टुकड़े उसे जीवन का अर्थ समझा गए थे… “जीवन के लिए खर्च” या “खर्च के लिए
जीवन” का नवीन अर्थ एक झटके में उसे समझ आ गया…

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20150719

''आपके हिसाब से इस गिलास का वज़न कितना होगा?''....



एक प्रोफ़ेसर ने अपने हाथ में पानी से भरा एक गिलास पकड़ते हुए अध्यापन शुरू किया ।
उन्होंने उसे ऊपर उठा कर सभी छात्रों को दिखाया और पूछा ,
''आपके हिसाब से इस गिलास का वज़न कितना होगा?''
50 ग्राम….
100 ग्राम…
125 ग्राम'…
छात्रों ने उत्तर दिया ।
जब तक मैं इसका वज़न ना कर लूँ
मुझे इसका सही वज़न नहीं बता सकता.
प्रोफ़ेसर ने कहा. ”पर मेरा सवाल है,
यदि मैं इस ग्लास को थोड़ी देर तक इसी तरह उठा कर पकडे रहूँ तो क्या होगा ?
‘कुछ नहीं’ …छात्रों ने कहा.
‘अच्छा , अगर मैं इसे मैं इसी तरह एक घंटे तक उठाये रहूँ तो क्या होगा ?' ,
प्रोफ़ेसर ने पूछा.
‘आपका हाथ दर्द करने लगेगा’,
एक छात्र ने कहा.
'तुम सही कह रहे हो,
अच्छा अगर मैं इसे इसी तरह पूरे दिन उठाये रहूँ तो का होगा?'
”आपका हाथ सुन्न हो सकता है,
आपके मांसपेशियों में भारी तनाव आ सकता है,
लकवा मार सकता है
और पक्का आपको अस्पताल जाना पड़ सकता है”…
.किसी छात्र ने कहा,
और बाकी सभी हंस पड़े…
“बहुत अच्छा ,
पर क्या इस दौरान गिलास
का वज़न बदला?”
प्रोफ़ेसर ने पूछा.
उत्तर आया
..”नहीं”
”तब भला हाथ में दर्द और मांशपेशियों में तनाव क्यों आया?”
छात्र अचरज में पड़ गए.
फिर प्रोफ़ेसर ने पूछा
” अब दर्द से निजात पाने के लिए मैं क्या करूँ?”
”ग्लास को नीचे रख दीजिये!
एक छात्र ने कहा.
”बिलकुल सही!”
प्रोफ़ेसर ने कहा.
जीवन की समस्याएं भी कुछ इसी तरह
होती हैं.
इन्हें कुछ देर तक अपने दिमाग में
रखिये
और लगेगा की सब कुछ ठीक है
उनके बारे में ज्यदा देर सोचिये
और आपको पीड़ा होने लगेगी.
और इन्हें और भी देर तक अपने दिमाग में रखिये
और ये आपको लकवाग्रस्त करने लगेंगी.
और आप कुछ नहीं कर पायेंगे.
अपने जीवन में आने
वाली चुनातियों और समस्याओं के बारे में सोचना ज़रूरी है,
पर उससे भी ज्यादा ज़रूरी है
दिन के अंत में सोने जाने से पहले उन्हें नीचे रखना.
इस तरह से, आप तनावग्रस्त नहीं रहेंगे,
आप हर रोज़ मजबूती और ताजगी के साथ उठेंगे और सामने आने
वाली किसी भी चुनौती का सामना कर सकेंगे .....।
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20150705



माँ ने एक शाम दिनभर की लम्बी थकान एवं काम के बाद जब डिनर बनाया तो उन्होंने पापा के सामने एक प्लेट सब्जी और एक जली हुई रोटी परोसी।

मूझे लग रहा था कि इस जली हुई रोटी पर पापा कुछ कहेंगे, परन्तु पापा ने उस रोटी को आराम से खा लिया।

हालांकि मैंने माँ को पापा से उस जली रोटी के लिए "साॅरी" बोलते हुए जरूर सुना था।

और मैं ये कभी नहीं भूल सकता जो पापा ने कहा: "मूझे जली हुई कड़क रोटी बेहद पसंद हैं।"

देर रात को मैंने पापा से पूछा, क्या उन्हें सचमुच जली रोटी पसंद हैं?

उन्होंने कहा- "तुम्हारी माँ ने आज दिनभर ढ़ेर सारा काम किया, ओर वो सचमुच बहुत थकी हुई थी।

और वैसे भी एक जली रोटी किसी को ठेस नहीं पहुंचाती परन्तु कठोर-कटू शब्द जरूर पहुंचाते हैं।

तुम्हें पता है बेटा - "जिंदगी भरी पड़ी है अपूर्ण चीजों से...अपूर्ण लोगों से... कमियों से...दोषों से...

मैं स्वयं सर्वश्रेष्ठ नहीं, साधारण हूँ , और शायद ही किसी काम में ठीक हूँ।

मैंने इतने सालों में सीखा है कि "एक दूसरे की गलतियों को स्वीकार करना... 
नजरंदाज करना... 
आपसी संबंधों को सेलिब्रेट करना।"

मित्रों, जिदंगी बहुत छोटी है...
उसे हर सुबह-शाम दु:ख...पछतावे...
खेद में बर्बाद न करें।

जो लोग तुमसे अच्छा व्यवहार करते हैं, उन्हें प्यार करें और जो नहीं करते उनके लिए दया, सहानुभूति रखें।
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20150523

"बिटिया एक एप्पल मुझे दे दो"....



एक छोटी सी बच्ची अपने दोनों हाथों में एक एक एप्पल लेकर खड़ी थी

उसकी मम्मी ने मुस्कराते हुए कहा कि
"बिटिया एक एप्पल मुझे दे दो"

इतना सुनते ही उस बच्ची ने एक एप्पल को दांतो से कुतर लिया.

उसकी मम्मी कुछ बोल पाती उसके पहले ही उसने अपने दूसरे एप्पल को भी दांतों से कुतर लिया

अपनी छोटी सी बेटी की इस हरकत को देखकर माँ ठगी सी रह गई और उसके चेहरे पर मुस्कान गायब हो गई थी...

तभी उसकी बेटी ने अपने नन्हे हाथ आगे की ओर बढाते हुए मम्मी को कहा....
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"मम्मी ये लो.. ये वाला ज्यादा मीठा है. .....
शायद हम कभी कभी पूरी बात जाने बिना निष्कर्ष पर पहुंच जाते हैं...................

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20150515

"माँ ये SC और ST क्या हैं ?" ......

स्कूल से एक 6th क्लास का बच्चा अपने घर आ कर अपनी माँ से पूछता है -

"माँ ये SC और ST क्या हैं ?"

माँ: बेटा ये तुम्हे क्यों जानना है ?
बच्चा: माँ आज सर हमसे पूछ रहे थे की कौन कौन sc st का हैं !!!!!

माँ: बेटा उन्होंने ऐसा क्यों पूछा उन्होंने नहीं बताया क्या ?

बच्चा: बताया पर सिर्फ इतना की जो जो sc st के हैं उन्हें पैसे मिलेगे और हो सकता है की obc वालो को भी दे दे पर माँ ये क्या होता हैं कास्ट?

माँ: बेटा हमारे सविधान में 4 कास्ट बनायीं है sc st obc और जनरल तो सरकार उन्हें गरीब और पिछड़े हुए लोगो को मदद करने के लिए सुविधा दी हैं।

बच्चा: पर माँ सिर्फ उन्हें ही क्यों मिलती हैं और मेरा दोस्त तो गरीब भी नहीं हैं फिर
भी उससे मिलेगे पैसे ..ये सुविधा गरीब के लिए हैं तो हम भी गरीब है न तो हमको क्यों नहीं मिलेंगे पैसे?

माँ: बेटा ये सविधान में लिखा है ।

बेटा: पर माँ सविधान के बारे में कहा था की सब को एक जैसा हक़ है तो फिर ये क्यों ?

माँ: बेटा ये सब राजनीति का गन्दा खेल हैं उनकी वजह से आज धर्म और जाति के नाम पर लोग एक सामान नही हैं
बेटा: पर माँ हम क्या हैं जिस से हम को पैसे नहीं मिलेगे ।

माँ: बदनसीब।
हम लोग बदनसीब है बेटा ।
पूरे विश्व में कही पर इस तरह का नियम नहीं है बस हमारे भारत में है ये सुविधा । ...सविधान निर्माता ने इसको सिर्फ 10 वर्ष के लिए रखा था पर ये देश के दलालो ने इसको पूर्ण रूप से लागू कर
दिया ।
....अगर इन्हें लागू करना ही है तो राजनीति में भी लागू करना चाहिए मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री भी sc और st का होना चाहिए तब पता चलेगा उन्हें भी ।

बेटा: माँ क्या आगे भी मुझे मुझे इसी तरह की दिक्कत होगी ???

माँ: हाँ बेटा । 
आगे तुझे पढ़ाई में,नोकरी में ,प्रमोशन में, हर जगह दिक्कत आएगी ...
जातिवाद का जहर तुझे मजबूर कर देगा और तू कितना भी सहन कर ले एक दिन तू जरूर बोलेगा की ये कोटा बंद करो ।

बेटा: माँ तो क्या हमारी मदद कोई नहीं करेगा काश में भारत छोड़ कही और पैदा हुआ होता ।

माँ: ऐसा नहीं बोलते बेटा इस धरती को हमारे पूर्वजो ने खून से सींचा हैं और बलिदान दिया है तुम्हे गर्व होना चाहिए की तुम एक भारतीय हो ।
बस ये सत्ता के भूखे लोग हमारी गरीबी दूर करने के बजाये वोट पाने की होड़ में हैं ।

बेटा: माँ मेरा दोस्त बोलता हैं की पैसे मिलेगे तो पार्टी करेगे. माँ हमें एक रोज
की रोटी बड़ी मुश्किल से मिलती हैं और मेरे दोस्त पार्टी करेगे । माँ में नहीं जाउगा स्कूल कल से ।

माँ: नहीं बेटा तुम रोज स्कूल जाओ और पढ़ो ....पढ़ लिख कर शायद तुम इस कोटा को बदल दो
बेटा : हा माँ में खूब पडूंगा पर हमारे पास इतने पैसे नहीं हैं की आगे पढ़ सकूँ...!!!

माँ: तू चिंता न कर मैं काम करुँगी न तेरी पढ़ाई के लिए |

इसे इतना शेयर करे कि ये सन्देश हमारे राजनेताओ तक पहुचे और वो सिर्फ गरीबो को कोटा दे न कि विकसित लोगो को |

यदि ये message आपको बार बार मिले तो परेशान न होए ।. 

इसे फिर शेयर कर दें। आपकी एक पहल शायद किसी प्रतिभाशाली व्यक्ति का जीवन सुधार दे।

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20150513

वह प्राइमरी स्कूल की टीचर थी |.....



       वह प्राइमरी स्कूल की टीचर थी | सुबह उसने बच्चो का टेस्ट लिया था और उनकी कॉपिया जाचने के लिए घर ले आई थी | बच्चो की कॉपिया देखते देखते उसके आंसू बहने लगे | उसका पति वही लेटे mobile देख रहा था |  उसने रोने का कारण पूछा । 

टीचर बोली , “सुबह मैंने बच्चो को  ‘मेरी सबसे बड़ी ख्वाइश’ विषय पर कुछ  पंक्तिया लिखने को कहा था ; एक बच्चे  ने इच्छा जाहिर करी है की भगवन उसे Mobile बना दे | 

यह सुनकर पतिदेव हंसने लगे | 

टीचर बोली , “आगे तो सुनो बच्चे ने  लिखा है यदि मै mobile बन जाऊंगा, तो घर में मेरी एक खास जगह होगी और  सारा परिवार मेरे इर्द-गिर्द रहेगा | जब मै बोलूँगा, तो सारे लोग मुझे ध्यान से सुनेंगे | मुझे रोका टोका नहीं जायेंगा और नहीं उल्टे सवाल होंगे | 

जब मै mobile बनूंगा, तो पापा ऑफिस से  आने के बाद थके होने के बावजूद मेरे  साथ बैठेंगे | मम्मी को जब तनाव होगा,  तो वे मुझे डाटेंगी नहीं, बल्कि मेरे साथ  रहना चाहेंगी | मेरे बड़े भाई-बहनों के बीच मेरे पास रहने के लिए झगडा होगा | 

यहाँ तक की जब mobile बंद रहेंगा, तब भी उसकी अच्छी तरह देखभाल होंगी | और हा, mobile के रूप में मै सबको ख़ुशी भी दे सकूँगा | “ 

यह सब सुनने के बाद पति भी थोड़ा  गंभीर होते हुए बोला , ‘हे भगवान ! बेचारा बच्चा …. उसके  माँ-बाप तो उस पर जरा भी ध्यान नहीं देते !’ 

टीचर पत्नी ने आंसूं भरी आँखों से उसकी तरफ देखा और बोली, 

“जानते हो, यह बच्चा कौन है? ………………………हमारा अपना बच्चा…… 

.. हमारा छोटू |” 

सोचिये, यह छोटू कही आपका बच्चा तो नहीं । .......



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20150502

रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने वाले लड़के की नजरें अचानक ....


रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने वाले लड़के की नजरें अचानक एक बुजुर्ग दंपति पर पड़ी। उसने देखा कि वो बुजुर्ग पति अपनी पत्नी का हाथ पकड़कर उसे सहारा देते हुए चल रहा था । थोड़ी दूर जाकर वो दंपति एक खाली जगह देखकर बैठ गए । कपड़ो के पहनावे से वो गरीब ही लग रहे थे ।
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तभी ट्रेन के आने के संकेत हुए और वो चाय वाला अपने काम में लग गया। शाम में जब वो चाय वाला वापिस स्टेशन पर आया तो देखाकि वो बुजुर्ग दंपति अभी भी उसी जगह बैठे हुए है ।
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वो उन्हें देखकर कुछ सोच में पड़ गया । देर रात तक जब चाय वाले ने उन बुजुर्ग दंपति को उसी जगह पर देखा तो वो उनके पास गया और उनसे पूछने लगा: बाबा आप सुबह से यहाँ क्या कर रहे है ? आपको जाना कहाँ है ?
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बुजुर्ग पति ने अपना जेब से कागज का एक टुकड़ा निकालकर चाय वाले को दिया और कहा: बेटा हम दोनों में से किसी को पढ़ना नहीं आता,इस कागज में मेरे बड़े बेटे का पता लिखा हुआ है ।मेरे छोटे बेटे ने कहा था कि अगर भैया आपको लेने ना आ पाये तो किसी को भी ये पता बता देना, आपको सही जगह पहुँचा देगा ।
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चाय वाले ने उत्सुकतावश जब वो कागज खोला तो उसके होश उड़ गये । उसकी आँखों से एकाएक आंसूओं की धारा बहने लगी ।
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उस कागज में लिखा था कि......... "कृपया इन दोनों को आपके शहर के किसी वृध्दाश्रम में भर्ती करा दीजिए, बहुत बहुत मेहरबानी होगी..."


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20150401

कोई ऐसा उपाय बताइये कि मेरे जीवन से सभी समस्याएं ख़त्म हो जाएं और मैं चैन से जी सकूँ ?

अजय राजस्थान के किसी शहर में रहता था . वह ग्रेजुएट था और एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता था . 

पर वो अपनी ज़िन्दगी से खुश नहीं था , हर समय वो किसी न किसी समस्या से परेशान रहता था और उसी के बारे में सोचता रहता था .

एक बार अजय के शहर से कुछ दूरी पर एक फ़कीर बाबा का काफिला रुका हुआ था . शहर में चारों और उन्ही की चर्चा थी , बहुत से लोग अपनी समस्याएं लेकर उनके पास पहुँचने लगे ,अजय को भी इस बारे में पता चला, और उसने भी फ़कीर बाबा के दर्शन करने का निश्चय किया .

छुट्टी के दिन सुबह -सुबह ही अजय उनके काफिले तक पहुंचा . वहां सैकड़ों लोगों की भीड़ जुटी हुई थी , बहुत इंतज़ार के बाद अजय का नंबर आया वह बाबा से बोला ,” बाबा , मैं अपने जीवन से बहुत दुखी हूँ , हर समय समस्याएं मुझे घेरी रहती हैं , कभी ऑफिस की टेंशन रहती है , तो कभी घर पर अनबन हो जाती है , और कभी अपने सेहत को लेकर परेशान रहता हूँ ….

बाबा कोई ऐसा उपाय बताइये कि मेरे जीवन से सभी समस्याएं ख़त्म हो जाएं और मैं चैन से जी सकूँ ?

बाबा मुस्कुराये और बोले , “ पुत्र , आज बहुत देर हो गयी है मैं तुम्हारे प्रश्न का उत्तर कल सुबह दूंगा …लेकिन क्या तुम मेरा एक छोटा सा काम करोगे …?” “ज़रूर करूँगा ..”, अजय उत्साह के साथ बोला .

“देखो बेटा , हमारे काफिले में सौ ऊंट हैं , और इनकी देखभाल करने वाला आज बीमार पड़ गया है , मैं चाहता हूँ कि आज रात तुम इनका खयाल रखो … और जब सौ के सौ ऊंट , बैठ जाएं तो तुम भी सो जाना …”, ऐसा कहते हुए बाबा अपने तम्बू में चले गए ..


अगली सुबह बाबा अजय से मिले और पुछा , “ कहो बेटा , नींद अच्छी आई .” “कहाँ बाबा , मैं तो एक पल भी नहीं सो पाया , मैंने बहुत कोशिश की पर मैं सभी ऊंटों🐪 को नहीं बैठा पाया , कोई न कोई ऊंट  खड़ा हो ही जाता …!!!”, अजय दुखी होते हुए बोला .”
“ मैं जानता था यही होगा …
आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ है कि ये सारे ऊंट एक साथ बैठ जाएं …!!!”, “ बाबा बोले . अजय नाराज़गी के स्वर में बोला , “ तो फिर आपने मुझे ऐसा करने को क्यों कहा ”

बाबा बोले , “ बेटा , कल रात तुमने क्या अनुभव किया , यही ना कि चाहे कितनी भी कोशिश कर लो सारे ऊंट . एक साथ नहीं बैठ सकते … तुम एक को बैठाओगे तो कहीं और कोई दूसरा खड़ा हो जाएगा 


इसी तरह तुम एक समस्या का समाधान करोगे तो किसी कारणवश दूसरी खड़ी हो जाएगी .. पुत्र जब तक जीवन है ये समस्याएं तो बनी ही रहती हैं … कभी कम तो कभी ज्यादा ….”
“तो हमें क्या करना चाहिए ?” , अजय ने जिज्ञासावश पुछा .

“इन समस्याओं के बावजूद जीवन का आनंद लेना सीखो … कल रात क्या हुआ , कई ऊंट रात होते -होते खुद ही बैठ गए , 

कई तुमने अपने प्रयास से बैठा दिए , पर बहुत से ऊंट तुम्हारे प्रयास के बाद भी नहीं बैठे … और जब बाद में तुमने देखा तो पाया कि तुम्हारे जाने के बाद उनमे से कुछ खुद ही बैठ गए …. कुछ समझे …. 

"समस्याएं भी ऐसी ही होती हैं , कुछ तो अपने आप ही ख़त्म हो जाती हैं , कुछ को तुम अपने प्रयास से हल कर लेते हो …
और कुछ तुम्हारे बहुत कोशिश करने पर भी हल नहीं होतीं , ऐसी समस्याओं को समय पर छोड़ दो … उचित समय पर वे खुद ही ख़त्म हो जाती हैं …. और जैसा कि मैंने पहले कहा … जीवन है तो कुछ समस्याएं रहेंगी ही रहेंगी …. पर इसका ये मतलब नहीं की तुम दिन रात उन्ही के बारे में सोचते रहो …

ऐसा होता तो ऊंटों की देखभाल करने वाला कभी सो नहीं पाता…. समस्याओं को एक तरफ रखो और जीवन का आनंद लो…
चैन की नींद सो … जब उनका समय आएगा वो खुद ही हल हो जाएँगी"... 


Source - Facebook

20150312

Inspirational Story - एक डॉक्टर को जैसे ही एक urgent सर्जरी के बारे में फोन करके बताया गया...


एक डॉक्टर को जैसे ही एक urgent सर्जरी के बारे में फोन करके बताया गया . वो जितना जल्दी वहाँ आ सकते थे आ गए. वो तुरंत हि कपडे बदल कर ऑपरेशन थिएटर की और बढे.

डॉक्टर को वहाँ उस लड़के के पिता दिखाई दिए, जिसका इलाज होना था. पिता डॉक्टर को देखते ही भड़क उठे, और चिल्लाने लगे.. "आखिर इतनी देर तक कहाँ थे आप? क्या आपको पता नहीं है की मेरे बच्चे की जिंदगी खतरे में है . क्या आपकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती.. आप का कोई कर्तव्य है या नहीं ? ”


डॉक्टर ने हलकी सी मुस्कराहट के साथ कहा- “मुझे माफ़ कीजिये, मैं हॉस्पिटल में नहीं था. मुझे जैसे ही पता लगा, जितनी जल्दी हो सका मैं आ गया.. अब आप शांत हो जाइए, गुस्से से कुछ नहीं होगा”


ये सुनकर पिता का गुस्सा और चढ़ गया. भला अपने बेटे की इस नाजुक हालत में वो शांत कैसे रह सकते थे… उन्होंने कहा- “ऐसे समय में दूसरों को संयम रखने का कहना बहुत आसान है. आपको क्या पता की मेरे मन में क्या चल रहा है.. अगर आपका बेटा इस तरह मर रहा होता तो क्या आप इतनी देर करते.. यदि आपका बेटा मर जाए अभी, तो आप शांत रहेगे? कहिये..”


डॉक्टर ने स्थिति को भांपा और कहा- “किसी की मौत और जिंदगी ईश्वर के हाथ में है. हम केवल उसे बचाने का प्रयास कर सकते है.. आप ईश्वर से प्राथना कीजिये.. और मैं अन्दर जाकर ऑपरेशन करता हूँ…” ये कहकर डॉक्टर अंदर चले गए.. करीब 3 घंटो तक ऑपरेशन चला.. लड़के के पिता भी धीरज के साथ बाहर बैठे रहे..


ऑपरेशन के बाद जैसे ही डाक्टर बाहर निकले.. वे मुस्कुराते हुए, सीधे पिता के पास गए.. और उन्हें कहा- “ईश्वर का बहुत ही आशीर्वाद है. आपका बेटा अब ठीक है.. अब आपको जो भी सवाल पूछना हो पीछे आ रही नर्स से पूछ लीजियेगा.. ये कहकर वो जल्दी में चले गए.. उनके बेटे की जान बच गयी इसके लिए वो बहुत खुश तो हुए.. पर जैसे ही नर्स उनके पास आई.. वे बोले.. “ये कैसे डॉक्टर है.. इन्हें किस बात का गुरुर है.. इनके पास हमारे लिए जरा भी समय नहीं है..”


तब नर्स ने उन्हें बताया.. कि ये वही डॉक्टर है जिसके बेटे के साथ आपके बेटे का एक्सीडेँट हो गया था.....
उस दुर्घटना में इनके बेटे की मृत्यु हो गयी.. और हमने जब उन्हें फोन किया गया.. तो वे उसके क्रियाकर्म कर
रहे थे… और सब कुछ जानते हुए भी वो यहाँ आए और आपके बेटे का इलाज किया...

नर्स की बाते सुनकर बाप की आँखो मेँ खामोस आँसू बहने लगे । मित्रो ये होती है इन्सानियत ""
जन्म लिया है तो सिर्फ साँसे मत लीजिये, जीने का शौक भी रखिये.. शमशान ऐसे लोगो की राख से...
भरा पड़ा है..."
Source - FACEBOOK